शीर्षक: “आंकड़ों में चमकता भारत, पर गाजीपुर के धरातल पर शिक्षा का अंधेरा”
“केन्द्रीय बजट 2026-27 में शिक्षा के लिए ₹1.39 लाख करोड़ का आवंटन, गर्ल्स हॉस्टल की सुविधा और डिजिटल लैब्स जैसे छात्रहितैषी कदम सराहनीय हैं। परंतु, बड़ा सवाल यह है कि क्या ये घोषणाएं कागजों से निकलकर धरातल पर उतर पाएंगी? अक्सर सरकारी फाइलें तो चमकती हैं, लेकिन आम छात्र का जीवन वहीं खड़ा रह जाता है।
इसका सबसे ज्वलंत प्रमाण गाजीपुर है। केंद्र सरकार की ‘सामाजिक प्रगति सूचकांक रिपोर्ट’ में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गाजीपुर पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान पर है। विडंबना देखिए, सर्वाधिक 350+ महाविद्यालयों वाला यह जनपद आज भी विश्वविद्यालय विहीन है। जब तक गाजीपुर में स्वतंत्र विश्वविद्यालय जैसा बुनियादी ढांचा तैयार नहीं होगा, तब तक बजट के ये भारी-भरकम आंकड़े युवाओं के लिए केवल एक ‘चुनावी जुमला’ बनकर रह जाएंगे। विकास केवल बिल्डिंग बनाने से नहीं, बल्कि गाजीपुर की मेधा को स्थानीय स्तर पर ‘क्वालिटी एजुकेशन’ और ‘रिसर्च’ का मंच देने से होगा। सरकार अपनी ही रिपोर्ट का सम्मान करे और गाजीपुर को तत्काल विश्वविद्यालय का हक दे।”
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