गाजीपुर। करंडा ब्लॉक के पंचायत सहायकों ने सरकार द्वारा दिए गए एग्री-स्टैक डिजिटल क्रॉप सर्वे के कार्य से खुद को अलग करने की मांग उठाई है। पंचायत सहायक कल्याण समिति ने खण्ड विकास अधिकारी को पत्र सौंपकर साफ कहा है कि वे इस कार्य को करने में पूर्णतः असमर्थ हैं।
पंचायत सहायकों ने शासनादेश संख्या 48/2025/913/2025/1862321/2025/125/39/2023 दिनांक 30 जुलाई 2025 का हवाला देते हुए बताया कि खरीफ मौसम 2025 से ई-खसरा पड़ताल (DSC) अन्तर्गत डिजिटल क्रॉप सर्वे का कार्य लेखपालों के स्थान पर प्राइवेट सर्वेयर और पंचायत सहायकों को सौंपा गया है। समिति का कहना है कि यह निर्णय न तो व्यावहारिक है और न ही न्यायोचित।
पंचायत सहायकों ने गिनाए कारण:
समिति ने इस कार्य से असमर्थता जताते हुए कई ठोस कारण गिनाए ग्राम पंचायत सचिवालय में पंचायत सहायक ही एकमात्र कर्मचारी है, फील्ड में जाने पर सचिवालय का संचालन रुक जाएगा।
अधिकांश सहायकों के पास सर्वे के लिए आवश्यक स्मार्टफोन या GPS युक्त उपकरण नहीं हैं। यह कार्य पूरी तरह कृषि विभाग का है, जबकि पंचायत सहायकों का कार्यक्षेत्र पंचायती राज विभाग तक सीमित है।
प्रोत्साहन राशि बेहद न्यूनतम है, जबकि इसके लिए निश्चित मानदेय की आवश्यकता है। मानसून के मौसम में खेतों में जाकर सर्वे करना जोखिमपूर्ण है। सांप-बिच्छू और अन्य खतरों की संभावना बनी रहती है, लेकिन इसका उत्तरदायित्व कोई अधिकारी नहीं ले रहा। महिला पंचायत सहायकों के लिए यह कार्य और भी खतरनाक हो सकता है।
समिति की मांग:
पंचायत सहायक कल्याण समिति ने साफ कहा कि उनकी कार्य-प्रकृति, संसाधन स्थिति और विभागीय भूमिका को ध्यान में रखते हुए पंचायत सहायकों को डिजिटल क्रॉप सर्वे से मुक्त किया जाए। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि इस मांग पर गौर नहीं किया गया तो आंदोलनात्मक कदम उठाने पड़ सकते हैं।
इस मौके पर राहुल सिंह, रत्ना गिरि, अंगद कुमार, प्रभाकर चौधरी, रिषभ यादव, जितेन्द्र चौरसिया, अश्वनी, ज्योति सिंह, खुशबू सिंह, प्रीति सिंह, अर्चना कुमारी, गोल्डी सिंह, गुड़िया यादव, पुनम यादव, विनीता यादव, वंदना यादव, कालिंदी आदि पंचायत सहायक मौजूद रहे।
गाजीपुर: पंचायत सहायकों ने बीडीओ को सौंपा पत्रक: एग्री-स्टैक डिजिटल क्रॉप सर्वे से खुद को किया अलग, बोले– यह काम हमारे बस का नहीं
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