(करंडा)गाजीपुर। जिले में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब आम नागरिक दिनदहाड़े सड़कों पर लुटने को मजबूर हैं, और पुलिस तमाशबीन बनी बैठी है। करण्डा थाना क्षेत्र के रमजनपुर नटवा वावा मार्ग पर एक अधेड़ व्यक्ति से मोबाइल छिनैती की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानिए क्या है मामला ?
बीते 24 सितम्बर की शाम लगभग 7:30 बजे, करंडा थाना क्षेत्र के सुआपुर निवासी रामप्रकाश गुप्ता मेदनीपुर बाजार से अपने घर लौट रहे थे। रास्ते में तीन बाइक सवार बदमाशों ने उन्हें घेरकर उनका स्मार्टफोन झपट लिया और मौके से फरार हो गए।
पीड़ित ने न केवल हिम्मत दिखाई बल्कि शोर मचाकर पीछा भी किया और 112 पर कॉल कर तुरंत पुलिस को सूचना दी। लेकिन अफ़सोस की बात है कि घटना के एक सप्ताह बाद भी न तो मोबाइल बरामद हुआ और न ही किसी आरोपी की पहचान हो सकी।
विशेष बात :–
छिना गया मोबाइल वही था, जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से छात्र-छात्राओं की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए वितरित किया गया था। एक सरकारी योजना के तहत दिया गया मोबाइल छीना जाना न सिर्फ़ व्यक्तिगत हानि है, बल्कि यह सरकार की योजनाओं पर भी एक तरह का हमला है।
लोगों में रोष :–
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि “जब पीड़ित खुद बदमाशों का पीछा कर सकता है, तो पुलिस क्या कर रही थी?” न तो कोई सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, न ही आसपास के इलाकों में कोई घेराबंदी हुई। थाने से सिर्फ वही पुराना जवाब मिला – “आवेदन दो, कार्रवाई होगी।”
तीन दिन बाद दर्ज हुई एफआईआर :–
तहरीर देने के तीन दिन बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की, लेकिन जांच की गति अभी भी बेहद धीमी है।
प्रशासन से अपेक्षा :–
अब सवाल यह है कि यदि आम नागरिक ही अपनी सुरक्षा के लिए खड़ा होगा, तो पुलिस की भूमिका क्या रह जाती है? लोगों की मांग है कि ऐसी घटनाओं पर त्वरित और ठोस कार्रवाई की जाए ताकि आम जनता का भरोसा कानून व्यवस्था पर बना रहे । गाजीपुर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस प्रकार की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि अपराध नियंत्रण में कहीं न कहीं भारी चूक हो रही है। पुलिस प्रशासन को चाहिए कि वह पीड़ित को केवल आश्वासन न देकर, प्रभावी कार्रवाई करके अपराधियों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजे ।
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