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Thursday, February 12, 2026
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गाजीपुर: भारत–रूस सम्बन्ध परस्पर विश्वास, सम्मान और वैश्विक संतुलन के आधार पर निरंतर हो रहें हैं सुदृढ़ : अंजली सिंह

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गाजीपुर। स्नातकोत्तर महाविद्यालय गाजीपुर में पूर्व शोध प्रबंध प्रस्तुत संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी महाविद्यालय के अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ तथा विभागीय शोध समिति के तत्वावधान में सेमिनार हाल में सम्पन्न हुई जिसमें महाविद्यालय के प्राध्यापक, शोधार्थी व छात्र – छात्राएं  आदि उपस्थित रहे। उक्त संगोष्ठी में कला संकाय के राजनीति विज्ञान विभाग के शोधार्थनि अंजली सिंह ने अपने शोध शीर्षक ”सोवियत संघ के विघटन के बाद भारत–रूस के सम्बन्धों का अध्ययन (2010 से वर्तमान तक)” नामक विषय पर अपना शोध प्रबन्ध व उसकी विषय- वस्तु प्रस्तुत करते हुए कहा कि सोवियत संघ के विघटन के बाद भारत और रूस के सम्बन्धों में प्रारंभिक अस्थिरता के पश्चात एक नया संतुलन स्थापित हुआ। 2010 के बाद दोनों देशों ने पारंपरिक मित्रता को बनाए रखते हुए सम्बन्धों को बहुआयामी स्वरूप दिया। यह काल भारत–रूस के बीच रक्षा, ऊर्जा, परमाणु सहयोग, विज्ञान, तकनीक और कूटनीति के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति का साक्षी रहा। रक्षा सहयोग इस साझेदारी का प्रमुख स्तंभ बना रहा। भारत ने रूस से S-400 वायु रक्षा प्रणाली, सुखोई व मिग लड़ाकू विमान तथा टैंक जैसे उपकरण प्राप्त किए। ब्रह्मोस मिसाइल परियोजना दोनों देशों के तकनीकी सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण बनी। इसके साथ ही परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में कुडनकुलम परमाणु संयंत्र जैसे प्रोजेक्टों ने सहयोग को नई दिशा दी। 2014 के बाद जब वैश्विक परिदृश्य में पश्चिमी देशों के साथ रूस के सम्बन्ध तनावपूर्ण हुए, तब भी भारत ने संतुलित विदेश नीति अपनाई। 2022 के रूस–यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत ने रणनीतिक स्वायत्तता का परिचय देते हुए किसी पक्ष का खुला समर्थन न करके अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी। इसी काल में रूस भारत के लिए सस्ती ऊर्जा का प्रमुख स्रोत बन गया, जिससे आर्थिक सहयोग में नई गति आई। वर्तमान समय में दोनों देश BRICS, SCO और G20 जैसे बहुपक्षीय मंचों पर घनिष्ठ सहयोग कर रहे हैं। हालाँकि आर्थिक और व्यापारिक विविधीकरण की आवश्यकता बनी हुई है, फिर भी भारत–रूस सम्बन्ध परस्पर विश्वास, सम्मान और वैश्विक संतुलन के आधार पर निरंतर सशक्त हो रहे हैं।  प्रस्तुतीकरण के बाद विभागीय शोध समिति, अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ व प्राध्यापकों तथा शोधार्थियों द्वारा शोध पर विभिन्न प्रकार के प्रश्न पूछे गए जिनका शोधार्थीनि अंजली सिंह ने संतुष्टिपूर्ण एवं उचित उत्तर दिया। तत्पश्चात् समिति एवं महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफे० (डॉ०) राघवेन्द्र कुमार पाण्डेय ने शोध प्रबंध को विश्वविद्यालय में जमा करने की संस्तुति प्रदान किया। इस संगोष्ठी में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफे०(डॉ०) राघवेन्द्र कुमार पाण्डेय, अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ के संयोजक प्रो० ( डॉ०) जी० सिंह, शोध निर्देशक एवं विभागाध्यक्ष, राजनीति विज्ञान विभाग प्रोफेसर(डॉ०) सुनील कुमार, प्रो०( डॉ०) मोहम्मद आबिद अंसारी, डॉ०आनंद सिंह, प्रो०(डॉ०) अरूण कुमार यादव,प्रो०(डॉ०) , डॉ०राम दुलारे, डॉ० रविशेखर सिंह, प्रो० (डॉ०) सत्येंद्र नाथ सिंह,  डॉ०एस०के० शुक्ला ,डॉ० सुशील कुमार सिंह, डॉ० राकेश वर्मा, डॉ०प्रतिमा सिंह, डॉ०रविशंकर सिंह, डॉ० संजय चतुर्वेदी, डॉ०प्रेमानंद यादव, डॉ०कमलेश, श्याम सुंदर, शोएब अहमद और  महाविद्यालय के प्राध्यापकगण तथा शोधार्थी आदि उपस्थित रहे। अन्त में शोध निर्देशक एवं विभागाध्यक्ष राजनीति विज्ञान विभाग प्रोफेसर (डॉ०) सुनील कुमार ने सभी का आभार व्यक्त किया। संचालन अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ के संयोजक प्रो०(डॉ०)जी० सिंह ने किया।

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