गाजीपुर। पर्यावरण संरक्षण गतिविधि, जौनपुर विभाग के तत्वावधान में खण्ड सैदपुर के महेश्वरी माता मंदिर, कौड़िया में रविवार को प्रकृति वंदन कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम में वक्ताओं ने प्रकृति संरक्षण और संतुलित विकास पर जोर दिया।
विकास की राह पर चलते हुए प्रकृति का सम्मान जरूरी – अजय दुबे
खण्ड संघचालक अजय दुबे ने कहा कि समाज को चाहिए कि वह विकास के पथ पर आगे बढ़े, लेकिन साथ ही प्रकृति का सम्मान करना न भूले। तभी आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और संतुलित पर्यावरण मिल सकेगा।
संजय सिंह ने सुनाया खेजड़ली गाँव का इतिहास:
विभाग संयोजक संजय सिंह ने 1730 के खेजड़ली गाँव का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि मारवाड़ के शासक राणा अभयसिंह ने मेहरानगढ़ किले के निर्माण के लिए लकड़ी कटवाने का आदेश दिया था। जब सैनिक खेजड़ली गाँव पहुँचे और पेड़ काटने लगे तो अमृता देवी बिश्नोई ने समाज की परंपरा का हवाला देकर विरोध किया। सैनिकों के न मानने पर अमृता देवी पेड़ से लिपट गईं और बोलीं – “सर साठे रुख रहे तो भी सस्तो जाण” (सिर कट जाए तो भी वृक्ष बचा रहे, यही सस्ता सौदा है)। इसके बाद अमृता देवी और उनकी तीन बेटियों सहित 363 लोगों ने वृक्षों की रक्षा के लिए बलिदान दिया।
23 से 31 अगस्त तक चलेगा प्रकृति वंदन अभियान-
इस अवसर पर बताया गया कि 23 अगस्त से 31 अगस्त तक प्रकृति वंदन कार्यक्रम के जरिए लोगों को प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसका उद्देश्य पर्यावरण को जीवनशैली का अभिन्न अंग बनाना है।
इनकी रही उपस्थिति-
कार्यक्रम में नवनीत सिंह, प्रशांत पांडेय, आकास सिंह, रणजीत सिंह, सुशील पांडेय, विशाल सिंह, अतुल सिंह, सौरभ सिंह, अंश सिंह सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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