गाज़ीपुर। नोनहरा कांड में भाजपा कार्यकर्ता सीताराम उपाध्याय की मौत पर अब प्रदेश स्तर पर हलचल तेज़ हो गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता दीपक कुमार पाण्डेय ने सबसे पहले प्रशासन पर 10 लाख देकर मामला दबाने का आरोप उजागर किया और पत्र लिखकर न्यायिक जांच, मुआवज़ा, सुरक्षा और सरकारी नौकरी की मांग उठाई।
उनकी पहल से प्रकरण प्रदेश नेतृत्व तक पहुँचा। रविवार को जिला प्रभारी राकेश त्रिवेदी, जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश राय और पूर्व जिलाध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाक़ात कर पूरी घटना की जानकारी दी।

मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि भाजपा संगठन और सरकार पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है और निष्पक्ष जांच के लिए SIT गठित कर दी जाएगी। इसके बाद नेता प्रदेश संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह से भी मिले, जिन्होंने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

केंद्र बिंदु बने अधिवक्ता दीपक कुमार पाण्डेय
इस पूरे प्रकरण में दीपक कुमार पाण्डेय एडवोकेट हाईकोर्ट इलाहाबाद ही वह मज़बूत आवाज़ बने, जिन्होंने मामले को दबाने की कोशिश का पर्दाफाश किया और संवैधानिक अधिकारों का हवाला देकर सरकार को मजबूर किया कि SIT जांच हो। आज पूरे गाज़ीपुर में उन्हें ही न्याय की लड़ाई का असली सेनानी माना जा रहा है।










