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Saturday, February 14, 2026
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गाजीपुर: तीन साल से जेल में बंद था हत्या का आरोपी , केस लड़ने के नहीं थे पैसे… जिला जज ने खुद दिलवाई कानूनी मदद, साक्ष्य के आभाव में बरी

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उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में तीन साल से हत्या के आरोप में जेल में बंद एक व्यक्ति को अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया. आर्थिक तंगी के चलते वह वकील नहीं रख पाया था, जिसके बाद जज ने खुद सरकारी वकील नियुक्त किया था.
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जेल में तीन साल से हत्या के आरोप में बंद आरोपी को कोर्ट ने बरी कर दिया. दरअसल, आर्थिक तंगी के कारण आरोपी व्यक्ति अपना केस लड़ने में सक्षम नहीं था. परिवार भी उसे छुड़ाने की कोशिश नहीं कर पाया. इस बात की जानकारी होते ही न्यायाधीश धर्मेंद्र कुमार पांडे ने इस केस के लिए सरकारी वकील नियुक्त किया. इसके बाद सरकारी वकील ने सारे तथ्य कोर्ट के सामने रखें और सफल पैरवी के बाद कोर्ट ने उसे रिहा क दिया.
गाजीपुर के जंगीपुर थाना के सरस्वतीनगर का रहने वाला गोलू उर्फ अमित गुप्ता बीते 3 साल से हत्या के आरोप में जेल में बंद था. आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण जेल में बंद होने के दौरान परिवार या फिर पत्नी ने केस लड़ने के लिए न्यायालय से किसी तरह का संपर्क नहीं किया गया और ना ही इस संबंध में अपना कोई वकील रखकर मामले की पैरवी कराई गई. इस बात की जानकारी होने पर जिला न्यायाधीश धर्मेंद्र कुमार पांडे ने इस केस के लिए सरकारी अधिवक्ता के रूप में रतन श्रीवास्तव को नियुक्त किया.

हत्या का आरोपी कोर्ट से बरी:

इसके बाद रतन श्रीवास्तव ने अमित गुप्ता के केस की पैरवी की और सारे तथ्य कोर्ट के सामने रखें. इसके बाद उनके सफल पैरवी के चलते इस हत्या के आरोप में अमित कुमार गुप्ता को सबूतों के अभाव में कोर्ट ने बरी कर दिया. इस मामले की सुनवाई जिला न्यायाधीश धर्मेंद्र कुमार पांडे की अदालत में चल रही थीं, जिसमें अभियोजन पक्ष ने कुल नौ गवाह पेश किए थे, लेकिन अमित गुप्ता के खिलाफ आरोप साबित नहीं हो पाया.

तीन साल तक जेल में बंद रहा आरोपी:


जिसके बाद कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में अभियुक्त की घटना में संलिप्तता नहीं मानी और 3 साल जेल में रहने के बाद उसे मामले से बरी कर दिया. इस पूरे मामले को कोर्ट ने बेनिफिट ऑफ डाउट कर देते हुए बरी किया. इस मामले में सरकारी अधिवक्ता रतन श्रीवास्तव ने बताया कि अमित गुप्ता राहुल कुशवाहा की हत्या के आरोप में साल 2022 से जेल में बंद था. इसके मामले में अमित की पैरवी परिवार की तरफ से नहीं की जा रही थी. इस मामले में अभियोजन पक्ष की तरफ से कुल 9 गवाह पेश किए गए, लेकिन आरोपी अमित गुप्ता को संदेह का लाभ देते हुए कोर्ट ने बरी कर दिया है.

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