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Thursday, February 12, 2026
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गाजीपुर: भतीजी से दुष्कर्म के मामले में दोषी चाचा को आजीवन कारावास 2,65000 रुपये का अर्थदंड

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गाज़ीपुर। ज़िले में वर्ष 2021 में हुई एक दर्दनाक घटना पर न्यायालय ने कठोर रुख अपनाते हुए पीड़िता को न्याय दिलाया है। पास्को (POCSO) न्यायालय ने भतीजी से दुष्कर्म के मामले में दोषी पाए गए रामचंद्र राम को आजीवन कारावास और 2,65,000 रूपए के अर्थदंड की सजा सुनाई। न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिया कि अर्थदंड की पूरी राशि पीड़िता को चिकित्सा, देखभाल और पुनर्वास के लिए तत्काल उपलब्ध कराई जाए।

इस बाबत विशेष लोक अभियोजक (पास्को) रविकांत पांडेय ने बताया कि पास्को न्यायालय के न्यायाधीश श्री राम अवतार  प्रसाद ने जमानिया थाना क्षेत्र में दर्ज इस गंभीर मामले में उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान और अपराध की अमानवीयता को देखते हुए यह फैसला सुनाया। मामला 29 मार्च 2021 का है।

अभियोजन के अनुसार, होली के दिन जब परिवार के सदस्य त्योहार में शामिल होने बाहर गए थे, तभी पीड़िता का चचेरा चाचा घर में अकेली पाकर उसे कमरे में ले गया और उसके मुंह में कपड़ा ठूंसकर जबरन दुष्कर्म किया। परिवार के लौटने पर डरी और सहमी पीड़िता ने रोते हुए पूरी घटना अपने परिजनों को बताई।

समाज के दबाव में FIR हुई देरी से दर्ज:

यह घटना पारिवारिक रिश्तों से जुड़ी होने और आरोपी के दबंग स्वभाव के कारण परिवार सामाजिक दबाव में आ गया। काफी समझाने-बुझाने और हिम्मत जुटाने के बाद लगभग ढाई महीने बाद 22 जून 2021 को जमानिया थाने में FIR दर्ज हो पाई । इसके बाद विवेचना प्रारंभ हुई और मामला 24 अप्रैल 2022 को न्यायालय के संज्ञान में आया।
कानूनी प्रक्रिया के दौरान अभियोजन पक्ष ने 6 गवाहों को अदालत में प्रस्तुत किया, जिन्होंने घटना की पुष्टि करते हुए अभियुक्त के अपराध को साबित किया।

पीड़िता हुई गर्भवती, न्यायालय ने माना अत्यंत गंभीर पहलू:

विशेष लोक अभियोजक पांडे ने बताया कि यह मामला इसलिए और भी गंभीर है क्योंकि दुष्कर्म के कारण पीड़िता गर्भवती हो गई थी और आज पीड़िता उस बच्चे की देखभाल कर रही है। इस तथ्य ने न्यायालय को अपराध की संवेदनशीलता और वीभत्सता का गहनता से संज्ञान लेने पर मजबूर किया ।
अदालत ने आरोपी रामचंद्र राम को धारा 376, 506, 304, 342 तथा पास्को एक्ट की धारा 5/6 के तहत दोषी पाते हुए कड़ी सजा सुनाई। पीड़िता की सुरक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य को प्राथमिकता देते हुए अदालत ने 2,65,000 रूपए का अर्थदंड भी निर्धारित किया, जिसे सीधे पीड़िता को देने का आदेश दिया गया है।

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