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Wednesday, March 18, 2026
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गाजीपुर: राष्ट्रीय लोक अदालत: 1 लाख 24 हजार 75 वाद निस्तारित

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गाजीपुर। न्यायालय गाजीपुर में राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ जनपद न्यायाधीश धर्मेन्द्र कुमार पाण्डेय द्वारा द्वीप प्रज्वलित कर किया गया। जनपद न्यायाधीश धर्मेन्द्र कुमार पाण्डेय द्वारा लोक अदालत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए यह बताया गया कि लोक अदालत से जहाँ एक ओर समय की बचत होती है, वहीं लम्बे समय से लम्बित मामलों के त्वरित निस्तारण का यह एक अत्यन्त महत्वपूर्ण साधन है। उनके द्वारा यह भी कहा गया कि जब लोक अदालत के माध्यम से किसी मामले का निस्तारण होता है तब उसके विरूद्ध कोई अपील नहीं होती है और विवाद हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है। जनपद न्यायाधीश धर्मेन्द्र कुमार पाण्डेय द्वारा लोक अदालत के सफलता हेतु सभी अधिकारियों को अधिक से अधिक निस्तारण हेतु प्रोत्साहित किया गया तथा सुलह समझौते के माध्यम से आपसी वैमनस्य को समाप्त करने का आवाहन किया गया। इस अवसर पर नोडल अधिकारी, राष्ट्रीय लोक अदालत शक्ति सिंह अपर जिला जज कोर्ट संख्या-1 द्वारा लोक अदालत के विषय में जानकारी देते हुए यह बताया गया कि आज की लोक अदालत किसानों, मजदूरों व सीमा पर डटे हुए जवानों को समर्पित है। कतार में खड़े हुए अंतिम व्यक्ति तक राष्ट्रीय लोक अदालत का लाभ पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है। उनके द्वारा यह भी कहा गया कि ऐसे छोटे प्रकरण जिसमें अनावश्यक रूप से मुकदमेबाजी के कारण पक्षकारों के मध्य वैमनस्यता विद्यमान रहती है, को समाप्त कर सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाने में लोक अदालत द्वारा अपनी सक्रिय भूमिका निभायी जा रही है।विजय कुमार-IV, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश / सचिव पूर्णकालिक जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, गाजीपुर द्वारा बताया गया कि इस राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 1 लाख 39 हजार 292 मामले निस्तारण हेतु नियत किये गये थे, जिसमें से सुलह समझौते एवं संस्वीकृति के आधार पर कुल 1 लाख 24 हजार 75 वाद अंतिम रूप से निस्तारित किये गये। विभिन्न न्यायालयों द्वारा 13 हजार 462 मामले तथा बैंक एवं अन्य विभाग द्वारा कुल 1 लाख 10 हजार 613 मामले निस्तारित किये गये। परिवार न्यायालय द्वारा कुल 03 विवाहित जोड़ो की सुलह कराकर विदाई करायी गयी। बैंको द्वारा लगभग 10 करोड़ 95 लाख धनराषि के मामलें इस लोक अदालत में निस्तारित किये गये। आज की राष्ट्रीय लोक अदालत में वृद्धा, दिव्यांग एवं विधवा पेंशन हेतु एक शिविर भी लगाया गया। इस अवसर पर मेडिकल कैम्प का भी आयोजन किया गया जिसमें विभिन्न रोगों के विशेषज्ञ डाक्टर मौजूद रहे। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय लोक अदालत के अवसर पर बिजली बिल, गृहकर एवं जल कर सहित अन्य सामाजिक योजनाओं से सम्बंधित पाण्डाल भी लगाये गये हैं। जनपद न्यायाधीश द्वारा कुछ दिव्यांगजनों को व्हील चेयर / बैसाखी आदि का वितरण भी किया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत में जनपद का सबसे पुराना आरबिट्रेशन वाद संख्या- 13/2014 महेन्द्रा एंड महेन्द्रा बनाम माता अमरावती विद्यालय, जो लगभग 11 वर्षों से लम्बित था, को पक्षों के मध्य सुलह समझाते के आधार पर निस्तारित किया गया है। उक्त प्रकरण अपर जिला जज प्रथम श्री शक्ति सिंह के यहाँ लम्बित था। सुलह समझौते के उपरान्त प्रकरण के अधिवक्ताओं को भी सम्मानित किया गया। इस अवसर पर पी.ओ. (एम.ए.सी.टी.) संजय हरिशुक्का, अपर जिला जज अली रजा,अभिमन्यू सिंह, रामअवतार प्रसाद, अलख कुमार, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नूतन द्विवेदी, सिविल जज (सी.डि.) अमित कुमार, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दिपेन्द्र कुमार गुप्ता, सिविल जज (सी.डि.) / एफ.टी.सी. श्रीमती अर्चना, सिविल जज (जूडि.) बेतांक चौहान, न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री हार्दिक सिंह, अपर सिविल जज (जू.डि.) अनन्त कुमार, दीक्षा त्रिपाठी, मेहनाज खान, मनी वर्मा, श्वेता नैन,शिवानी, संदेश कुमार पासवान, सोनाली प्रिया गौर व रंजना देवी, बार के पदाधिकारीगण, न्यायालय के कर्मचारीगण एवं वादकारी उपस्थित रहे।

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