गाजीपुर। करंडा थाना क्षेत्र में इन दिनों एक थाना प्रभारी के चर्चे हर जुबान पर हैं। करंडा थानाध्यक्ष अशोक कुमार गुप्ता अपनी सख्त कार्यशैली और संवेदनशीलता के कारण जनता के बीच ‘सिंघम’ के रूप में पहचाने जा रहे हैं। थाना में आने वाला हर फरियादी इस बात का गवाह है कि वहाँ न्याय की उम्मीद सिर्फ की नहीं जाती, बल्कि उसे तुरंत पूरा भी किया जाता है।
थाना में सुनवाई, मौके पर समाधान:
अक्सर देखा जाता है कि पुलिस दफ्तरों में प्रार्थना पत्र देने के बाद लोग हफ्तों चक्कर काटते हैं, लेकिन थानाध्यक्ष करंडा अशोक कुमार गुप्ता की कार्यप्रणाली बिल्कुल अलग है। वे अपने थाना में आने वाले हर एक नागरिक की फरियाद को बेहद गहनता से सुनते हैं।
मामले की गंभीरता को समझते हुए वे तत्काल संबंधित को बुलाते हैं और प्रार्थना पत्र के त्वरित निवारण के लिए सख्त आदेश जारी करते हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि जनता की समस्या में देरी का मतलब न्याय में देरी है।
अपराध नियंत्रण लिया एसओ ने संकल्प:
थाना प्रभारी करंडा का एक ही मूलमंत्र है, अपराध पर नियंत्रण और आमजन की सुरक्षा’। उन्होंने कड़ा संकल्प लिया है कि जब तक वे इस पद पर हैं, अपने थाना क्षेत्र में किसी भी अपराधी को सिर उठाने या अपराध को पनपने नहीं देंगे। उनकी इस सख्ती से अपराधियों में खौफ है, तो वहीं आम नागरिकों में सुरक्षा की भावना बढ़ी है।
जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना:
एक थानाध्यक्ष होने के बावजूद अशोक कुमार गुप्ता आम लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाली अधिकारी माने जाते हैं। चाहे आम नागरिक की मदद करना भी क्यों न हो, वे हमेशा फ्रंटलाइन पर खड़े रहते हैं। यही वजह है कि आज थाना क्षेत्र की कुछ जनता उन्हें अपना सच्चा मार्गदर्शक और रक्षक मानते है।
”मेरा लक्ष्य केवल कानून व्यवस्था बनाए रखना ही नहीं, बल्कि पुलिस और जनता के बीच के विश्वास को इतना मजबूत करना है कि कोई भी पीड़ित बेझिझक अपनी बात कह सके।” – अशोक कुमार गुप्ता, थानाध्यक्ष करंडा गाजीपुर







