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Saturday, February 7, 2026
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चेहरा नहीं, सिर्फ दहशत— पूर्वांचल का ‘अदृश्य शूटर’ बनारसी यादव
नाम फाइलों में था, तस्वीर कहीं नहीं… अपराध की दुनिया का रहस्यमयी किरदार

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गाजीपुर। पूर्वांचल के आपराधिक इतिहास में लंबे समय तक एक ऐसा नाम रहा, जिसने बिना सामने आए ही खौफ पैदा किया— बनारसी यादव। सुपारी लेकर हत्याएं करने वाला यह शूटर पुलिस रिकॉर्ड में तो दर्ज था, लेकिन न उसका स्पष्ट हुलिया था और न कोई पुख्ता तस्वीर। यही कारण रहा कि कई संगीन वारदातों के बावजूद वह वर्षों तक कानून की पकड़ से बाहर रहा और अपराध जगत में ‘अदृश्य शूटर’ के नाम से कुख्यात हो गया।

नाम सामने आया, चेहरा फिर भी ओझल:


पुलिस सूत्रों के अनुसार, बनारसी यादव का नाम कई गंभीर मामलों में सामने आया, लेकिन हर बार वह पर्दे के पीछे ही रहा। वारदात को अंजाम देने वाले शूटर बदल जाते थे, गवाह नहीं मिलते थे और बनारसी खुद कभी मौके पर देर तक नहीं रुकता था।सारनाथ क्षेत्र में कॉलोनाइजर महेंद्र गौतम की हत्या के बाद पहली बार पुलिस को ठोस संकेत मिले कि बनारसी यादव वाराणसी में सक्रिय है। यही घटना उसके अदृश्य रहने के दौर के अंत की शुरुआत बनी।

मोबाइल से दूरी, यही थी पहचान:


सूत्र बताते हैं कि बनारसी यादव कभी मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करता था। न सोशल मीडिया, न डिजिटल संपर्क—सिर्फ संदेशवाहकों और आमने-सामने की बातचीत पर भरोसा।लगातार ठिकाने बदलना और पहचान छुपाकर रहना उसकी सबसे बड़ी रणनीति थी, जो उसे पुलिस से एक कदम आगे रखती थी।

माफिया नेटवर्क के लिए करता था काम:


गाजीपुर जिले के खानपुर थाना क्षेत्र का निवासी बनारसी यादव पूर्वांचल के कई आपराधिक नेटवर्क और माफियाओं के लिए सुपारी किलिंग कर चुका था। वह किसी बड़े गिरोह का चेहरा नहीं, बल्कि पर्दे के पीछे रहकर काम करने वाला शार्पशूटर था—जो पैसे के बदले बिना सवाल किए हत्या को अंजाम देता था।इसी वजह से उसका नाम तो फैलता गया, लेकिन उसकी व्यक्तिगत पहचान आम लोगों ही नहीं, कई पुलिसकर्मियों के लिए भी धुंधली बनी रही।

सारनाथ हत्याकांड के बाद टूटा रहस्य:


महेंद्र गौतम हत्याकांड की गहन जांच में पुलिस को बनारसी यादव की गतिविधियों की ठोस कड़ियां मिलने लगीं। इसके बाद पुलिस और STF ने उसकी तलाश तेज की। आखिरकार वही वारदात उसके अपराधी जीवन के अंत की वजह बनी और वर्षों से चला आ रहा रहस्य का घेरा टूट गया।

अपराध जगत के लिए साफ संदेश:


बनारसी यादव की कहानी इस बात की मिसाल है कि अपराध की दुनिया में कोई चाहे जितना समय छुपा रहे, कानून की नजर से हमेशा नहीं बच सकता।नाम डर पैदा कर सकता है, चेहरा सालों तक ओझल रह सकता है लेकिन अंततः कानून की पकड़ से कोई भी बाहर नहीं।
पूर्वांचल के अपराध जगत का एक रहस्यमयी अध्याय यहीं समाप्त हो गया।

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