पूर्वांचल की आपराधिक दुनिया में एक नाम ऐसा था, जिसे पुलिस जानती थी, मगर पहचान नहीं पाती थी — बनारसी यादव। वह पूर्वांचल के बड़े और शातिर शूटरों में गिना जाता था। सुपारी लेकर हत्याएं करना उसका पेशा था, लेकिन हैरानी की बात यह थी कि वर्षों तक पुलिस के पास न तो उसका स्पष्ट चेहरा था और न ही कोई पुख्ता तस्वीर।
सीरियल–1: पुलिस की पकड़ से दूर क्यों था बनारसी?
बनारसी यादव कभी मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करता था। वह एक जगह टिककर नहीं रहता और बार-बार हुलिया बदलने में माहिर था। यही वजह थी कि कई गंभीर वारदातों को अंजाम देने के बाद भी वह पुलिस की पकड़ से दूर रहा। पुलिस सिर्फ उसका नाम जानती थी, चेहरा नहीं।
सीरियल–2: कॉलोनाइजर महेंद्र गौतम की हत्या से खुला राज
सारनाथ इलाके में कॉलोनाइजर महेंद्र गौतम की हत्या के बाद जब जांच आगे बढ़ी, तो पहली बार बनारसी यादव का नाम मजबूती से सामने आया। लंबी छानबीन के बाद पुलिस को उसकी तस्वीर हाथ लगी। इसके बाद से ही STF और पुलिस की टीमें उसकी तलाश में जुट गईं।
सीरियल–3: 21 अगस्त 2025 की दिनदहाड़े हत्या
करीब पांच महीने पहले गाजीपुर के रहने वाले प्रॉपर्टी डीलर योगेंद्र यादव ने 50 करोड़ की जमीन के विवाद में कॉलोनाइजर महेंद्र गौतम की हत्या की साजिश रची। इस हत्या के लिए बनारसी यादव को 5 लाख रुपये की सुपारी दी गई।
21 अगस्त 2025 को बदमाशों ने ऑफिस जा रहे कॉलोनाइजर को दिनदहाड़े गोलियों से भून दिया। इस मामले में पुलिस ने बनारसी यादव पर 1 लाख रुपये का इनाम घोषित किया।
सीरियल–4: STF से आमना-सामना
मंगलवार देर रात इनपुट के आधार पर STF ने बनारसी यादव को वाराणसी में घेर लिया। इंस्पेक्टर ने उसे आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी, लेकिन बनारसी ने पुलिस पर फायरिंग कर दी।
दो सिपाहियों के पास से गोलियां गुजरीं, लेकिन वे बाल-बाल बच गए। इसके बाद STF ने जवाबी कार्रवाई की।
सीरियल–5: पांच राउंड फायरिंग और अंत
बनारसी यादव और STF जवानों के बीच आमने-सामने करीब पांच राउंड फायरिंग हुई। इस दौरान दो गोलियां बनारसी को लगीं और वह जमीन पर गिर पड़ा। उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
सीरियल–6: आपराधिक रिकॉर्ड और बरामदगी
एनकाउंटर के बाद बनारसी यादव के पास से दो पिस्टल और कारतूस बरामद किए गए। वह गाजीपुर के खानपुर थाना क्षेत्र का रहने वाला था।
उस पर वाराणसी, गाजीपुर सहित कई जिलों में 10 हत्याओं समेत 21 मुकदमे दर्ज थे।
अंत में…
जिस बनारसी यादव को पुलिस वर्षों तक सिर्फ नाम से जानती थी, उसका अंत एक
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