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Monday, May 4, 2026
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गाजीपुर: कृषि विज्ञान केंद्र आंकुशपुर गाजीपुर के वैज्ञानिकों ने कृषक महिलाओं को जैविक बीज उत्पादन हेतु किया जागरूक

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गाजीपुर। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज,अयोध्या के अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केंद्र आंकुशपुर गाजीपुर के द्वारा ग्राम- धामूपुर  ब्लॉक- करण्डा में किसानों को जागरूक करने हेतु उर्वरकों का संतुलित प्रयोग विषय पर एक विशेष जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया । डॉ0 ए0 के0 सिंह ( पशुपालन वैज्ञानिक ) ने किसानों को रासायनिक खेती से घटती मिट्टी की उर्वरा शक्ति और बढ़ती लागत के बीच जैविक बीज उत्पादन किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। जैविक बीज तैयार करने की पूरी प्रक्रिया समझाई। किसानों  को अवगत भी कराया कि आज के दौर में कृषि और पशुपालन को अलग-अलग करके देखना न केवल आर्थिक नुकसान का सौदा है बल्कि यह मिट्टी की सेहत के लिए भी चिंताजनक है। खेती की बढ़ती लागत और रसायनों के अंधाधुंध प्रयोग ने मृदा स्वास्थ्य को गंभीर संकट में डाल दिया है, जिसका सीधा असर पशुओं के स्वास्थ्य और दूध की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। डॉ. नरेंद्र प्रताप (वैज्ञानिक पादप प्रजनन)ने किसानों को विस्तार से बताया कि लगातार असंतुलित उर्वरक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता घट रही है। उन्होंने किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों के प्रयोग की सलाह दी। डॉ0  दीपक प्रजापति (मृदा वैज्ञानिक), ने किसानों को केंचुआ खाद, कम्पोस्ट को  मिट्टी में मिलाने से होने वाले लाभ के बारे में बिस्तार से बताया | सब्जीयों में उर्वरक प्रबंधन के तहत  एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन˛ जैविक खेती पर भी चर्चा किया I डॉ0 प्रजापति ने किसानों को अवगत कराया केंचुआ खाद सब्जियों की खेतों में प्रयोग करने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति  जैसे, मिट्टी में  कार्बन, नत्रज़न, फास्फोरस, पोटैशियम‚ सूक्ष्म पोषक तत्वों एवं भौतिक गुणों में भी  वृद्धि होता है, फसलों में निरन्तर अन्तराल पर जीवामृत का छिड़काव करने से कीटों का प्रकोप कम हो जाता है और मृदा का स्वास्थ्य बना रहता है I कार्यक्रम में डॉ. पंकज कुमार (कृषि अभियांत्रिकी वैज्ञानिक) ने किसानों को जैविक विकल्पों और नवीन तकनीकों के बारे में जागरूक किया। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों पर पूरी तरह निर्भर रहना दीर्घकाल में नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाना जरूरी है।

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